“आज बहुत दिनों के बाद ओ बहुत खुश थी”
लगता था की जैसे ओ फ़िर से अपनी पुरानी जिंदगी मे आ गई हों
आज उसका एक मेसेज मिला की " आज मै बहुत खुश हु " मैने उसका जवाब दिया की आप को खुश देख कर मै भी बहुत खुश हु और फ़िर ओ अपनी छोटी सी दुनिया मे खो गई अपने दोस्तों के साथ । पर पहले ओ इतना बात नही करती थी जब भी ऑनलाइन मुलाकात होती थी कुछ न कुछ बहाना बना कर चली जाती थी और कुछ दिनो बाद मै अपने गाव चला गया दादा जी बहुत बीमार थे , मै जब वापस आया तो एक दिन मुलाकात इस छोटी सी आशा से हुई बस इऊ ही मैने पूछ लिया क्या हाल है तो पता चला की उनके दादा जी अब इस दुनिया मे नही रहे सुन कर बहुत दुःख हुआ यही से हमारी बात सुरु हुई थी । फ़िर तो जब भी ओ ऑनलाइन मुलाकात होती थी कुछ न कुछ ख़बर जरुर लाती थी आज ऐ हो गया आज ओ हो गया अपने आस पास की घटनाओ से अवगत कराती थी।बिल्कुल छोटे बच्चो की तरह ओ सब बता जाती थी । फ़िर मै अपने काम मे वयस्त रहने लग गया और नेट पे भी आना कम हो गया था और फ़िर एक दिन अचानक छोटी सी आशा से मै ऑनलाइन मिला ओ बहुत परेशान सी लग रही थी लगता था जैसे ओ कुछ कहना चाह रही हो पर कह नही पा रही थी पर जब उसने अपनी तकलीफ बताई तो लगा की सारे दुखो का पहाड़ उसी पे टूट पड़ा है उसकी एक छोटी सी आशा दहेज की भेट चढ़ चुकी थी अब उसकी समज मे नही आ रहा था की उसकी गलती क्या है , ओ किस गलती की सजा भुगत रही है
आज उसका एक मेसेज मिला की " आज मै बहुत खुश हु " मैने उसका जवाब दिया की आप को खुश देख कर मै भी बहुत खुश हु और फ़िर ओ अपनी छोटी सी दुनिया मे खो गई अपने दोस्तों के साथ । पर पहले ओ इतना बात नही करती थी जब भी ऑनलाइन मुलाकात होती थी कुछ न कुछ बहाना बना कर चली जाती थी और कुछ दिनो बाद मै अपने गाव चला गया दादा जी बहुत बीमार थे , मै जब वापस आया तो एक दिन मुलाकात इस छोटी सी आशा से हुई बस इऊ ही मैने पूछ लिया क्या हाल है तो पता चला की उनके दादा जी अब इस दुनिया मे नही रहे सुन कर बहुत दुःख हुआ यही से हमारी बात सुरु हुई थी । फ़िर तो जब भी ओ ऑनलाइन मुलाकात होती थी कुछ न कुछ ख़बर जरुर लाती थी आज ऐ हो गया आज ओ हो गया अपने आस पास की घटनाओ से अवगत कराती थी।बिल्कुल छोटे बच्चो की तरह ओ सब बता जाती थी । फ़िर मै अपने काम मे वयस्त रहने लग गया और नेट पे भी आना कम हो गया था और फ़िर एक दिन अचानक छोटी सी आशा से मै ऑनलाइन मिला ओ बहुत परेशान सी लग रही थी लगता था जैसे ओ कुछ कहना चाह रही हो पर कह नही पा रही थी पर जब उसने अपनी तकलीफ बताई तो लगा की सारे दुखो का पहाड़ उसी पे टूट पड़ा है उसकी एक छोटी सी आशा दहेज की भेट चढ़ चुकी थी अब उसकी समज मे नही आ रहा था की उसकी गलती क्या है , ओ किस गलती की सजा भुगत रही है
इस घटना के बाद मै जब भी बात करता था तो मै सोचता था की किसी तरह ये अपने साथ हुई पुरानी बातो को भूल जाए और अपनी ख्वाबो की दुनिया मे चाँद तारों को छूने की आशा रखे और उसे हकीकत मे बदले और बहुत दिनों बाद ओ फ़िर से पहले की तरह लग रही थी उसकी बातो मे थोडा विश्वास दिखाई दे रहा था
“ ओ अपना कदम चाँद तारों को छूने के लिए ये बढ़ा चुकी थी ”

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