
“न्याय का कत्ल”
मोबाइल पे एक "एस ऍम एस" आया !
लिखा था “एक जान की कीमत एक रुपए”
“वारैन एंडरसन जीत गया और सभी भारतीय हार चुके है”
ये कमाल है भारतीय शासन और न्याय प्रणाली का जिसके नाकारेपन पर अब शर्म आ रही है .खुले आम जो कत्ल हुआ है उस पर भी हमारी निकामी सरकार ने दोसियो को सजा सुनने मे २५ साल लगा दिया. "दुनिया की सबसे ब़डी त्रासदियों में से एक भोपाल गैस कांड के लिए जिम्मेदारों को केवल दो-दो साल की सजा अपमानजनक है।
जस्टिस फैजानुद्दीन, पूर्व लोकायुक्त ने कहा की सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर भूल की समाचार पत्रों में ऐसे बयान आ रहे हैं कि विदेश मंत्रालय से ऐसा आदेश था कि वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण पर जोर न दिया जाए। ऐसी स्थिति में आज तो प्रत्यर्पण बिल्कुल संभव नहीं है। घटना के बाद से ही अमेरिका की सरकार का दबाव रहा होगा। इसका अंदाजा एंडरसन को छह घंटे में जमानत मिलने और उसके लौट जाने से लगता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गंभीर भूल की है जो इतने बड़े हादसों में उन धाराओं के तहत मुकदमा चलाए जाने के आदेश दिए जिनमें दो साल तक की सजा का ही प्रावधान था।
भोपाल की जनता के साथ खिलवाड़ किया गया।केंद्र और प्रदेश सरकार ने जांच में हस्तक्षेप कर असली आरोपियों को बचाने की कोशिश की। इससे सीबीआई की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग गया है।
दुनिया भर के मीडिया ने भोपाल गैस कांड पर भारत सरकार के रवैये को संवदेनहीन करार देते हुए उसकी कड़ी निंदा की है। गौरतलब है कि अदालत ने गैस कांड में आठ लोगों को दोषी ठहराते हुए महज दो साल की कैद की सजा सुनाई थी। इन आठ लोगों में एक की मौत हो चुकी है, बाकी आठ को जमानत पर रिहा कर दिया गया। अमेरिकी मीडिया ने भी भारतीय न्याय व्यवस्था की खिंचाई की है। द न्यू यॉर्क टाइम्स ने कहा है, भारतीय कोर्ट बदनाम होने की हद तक धीमी गति से काम करती हैं। भोपाल गैस त्रासदी मामले में तो यह साबित हो गया है कि पैसे वाले भारतीय न्याय व्यवस्था को मूर्ख बना सकते हैं।
एक हमारी मीडिया है जिसको राखी सावत से फुर्सत कहा की भोपाल गैस पीडितो का मुदा उठाए ओ तो टी आर पी के लिए टीवी सीरियल को भी न्यूज़ बना देती है.
पता नहीं हमारे इस लाचार देश की लाचार न्याय प्रणाली की टी आर पी कब बढ़ेगी.........??????

